बाबा की क्लास
विषय- महाभारत में महानायक कौन?
क्लास में बाबा के आने के पहले आज रवि और राजू की बहस हो रही है-
रवि- राजू! तुम जानते हो कि भारत और महाभारत में क्या अन्तर है?
राजू - इसमें कौन सी बड़ी बात है, भारत माने हमारा देश इंडिया और महाभारत माने कौरव पॉंडवों की लड़ाई और क्या?
रवि- इसमें क्या सही है?
चंदु बीच में ही बोला अरे दोनों ही सही हैं। इसी बीच बाबा ने आकर इस प्रकार समझाया-
बाबा-
‘महाभारत‘ केवल कौरवों और पांडवों की लड़ाई नहीं है और न ही उसके नायक युधिष्ठिर हैं न ही दुर्योधन, उसके महानायक हैं श्रीकृष्ण। छोटे छोटे राज्यों (मगध, अंग, बंग, कलिंग) में विभाजित भारत के राजा अपने अपने स्वार्थ और वर्चस्व के लिए लड़ते रहते थे, अलग अलग धार्मिक मान्यताओं में उलझे लक्ष्यविहीन थे, इन्हीं सबके एकीकरण का महान लक्ष्य था श्रीकृष्ण का।
भौगोलिक दूरियों, भूभागों और बिखरी जातियों को परस्पर जोड़ने के लिए उन्होंने अंतर्जातीय विवाहों की प्रेरणा दी। पश्चिमी भूभाग (पाञ्चाल और कुरु) के निवासी पांडवों के सम्बन्ध को पूर्वी प्रांतों तक फैलाया। भीम का विवाह नागालैंड की मंगोल कन्या हिडिम्बा से कराया, अर्जुन की पत्नी चित्रांगदा मणिपुर की मंगोल कन्या थी, कृष्ण ने स्वयं नेफा की रुक्मिणी से विवाह किया और छोटी बड़ी जातियों को मिला कर भारतीय जाति का बड़ा रूप खड़ा किया जिससे ‘एक समाज‘ गठित हो सका।
धर्म के नाम पर भी अनेक विधियां प्रचलित थीं, बड़े बड़े ऋषि मुनि थे, अनेक संप्रदाय थे, महाराज जरासंध अविद्या तंत्र के उपासक थे, महाराज जयद्रथ शैव थे, महर्षि गर्ग वैष्णव थे, मामा कंस शाक्त थे, इसके आलावा कौल साधकों का वर्ग भी था। कृष्ण ने इन सभी को पाप और पुण्य दो ध्रुवों में ध्रुवीकृत किया। महाभारत का युद्ध कराकर पाप का अंत कराया। इस प्रकार टुकड़ों में बंटे भारत और भारत के धर्म को दृढ़ प्लेटफार्म देकर बड़े आदर्श में गूँथ कर एक महान भारत बनाने का कार्य ही महाभारत है जिसके महानायक हैं श्रीकृष्ण।
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